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10 Sep 2025 · 1 min read

Apno ki Talaash -- Sasural

जब खोलती हूँ अपनी आँखें,
तो खालीपन-सा नज़र आता है,
वही रोज़-रोज़ की ज़िंदगी से
मन घबरा-सा जाता है।

पति देव, घर और बच्चों में ही
पूरा दिन निकल जाता है,
मैं भी कहीं दुनिया में हूँ…
ये तो अब मुझे ही याद नहीं आता है।

जब सुनने को मिलता है ससुराल में,
तो माँ… आपका आँचल बड़ा याद आता है।
जब सोती थी गोद में सिर रखकर,
आपका वो प्यार भरे हाथों से सिर पर सहलाना
बहुत याद आता है।

जब अपनी ज़िद से अपनी हर wish पूरी करा लेती थी,
और आप हारकर “हाँ” कर देते थे,
वो पापा का हारना…
आज बहुत याद आता है।

अब ज़िद करूँ तो किससे?
ऐसा कोई नज़र भी नहीं आता है…

ननद भी है बहन जैसी,
यही सब कहते हैं, पर
बहन जैसा एक भी गुण
ननद में नज़र नहीं आता है।

“तू चिंता मत कर बहन, मैं साथ हूँ तेरे”
ये हमेशा कहकर हिम्मत बढ़ाने वाला भाई
कहीं नज़र नहीं आता है।

कहने को तो सब हैं अपने,
बस… अपना ही कोई नज़र नहीं आता है।

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