दो तन होकर मन एक हुए
दो तन होकर मन एक हुए
फिर राधा श्याम कहां अलग हुए
पीड़ा दोनों की एक सी है
फिर प्रेम भला कहां अलग हुए
जो बनकर धड़कन धड़के दोनों के तन में
वो राधा कृष्ण फिर कहां अलग हुए…!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”
दो तन होकर मन एक हुए
फिर राधा श्याम कहां अलग हुए
पीड़ा दोनों की एक सी है
फिर प्रेम भला कहां अलग हुए
जो बनकर धड़कन धड़के दोनों के तन में
वो राधा कृष्ण फिर कहां अलग हुए…!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”