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31 Aug 2025 · 1 min read

#ग़ज़ल-

#ग़ज़ल-
■ बिन साथी बेजान सफ़र।।
【प्रणय प्रभात】

● चेहरों की पहचान सफ़र।
मत कहिए आसान सफ़र।।

● कभी तो है वरदान सफ़र।
कभी मगर हैवान सफ़र।

● बीच में मुझको रोक लिया।
कितना है शैतान सफ़र।।

● काटे कटता नहीं कभी।
बिन साथी बेजान सफ़र।।

● पूछ कभी इन राहों से।
अपना है ईमान सफ़र।।

● झील सा है ख़ामोश कभी।
कभी मगर तूफ़ान सफ़र।।

● जेब में रखना नाम पता।
मौत का है सामान सफ़र।।

● मंज़िल ज़्यादा दूर नहीं।
करता चल इंसान सफ़र।।

● सबका वज़न बताता है।
इक ऐसी मीज़ान सफ़र।।

● ज़ालिम कभी कभी लेकिन।
भोला सा नादान सफ़र।।

● चाहे कितना थक जाएं।
पंखों का अरमान सफ़र।।

● हर होनी-अनहोनी से।
रहता है अंजान सफ़र।।
🍳🍳🍳🍳🍳🍳🍳🍳🍳🍳
●संपादक/न्यूज़&व्यूज़●
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

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