लखे अंध गहते जहाँ में रवि
लखे अंध गहते जहाँ में रवि
रुआँसे हुए क्यों बताओ कवि
अँधेरा बसे प्रज्ञ दीप तले
निराला दीपन कूप में पले।।
संजय निराला
लखे अंध गहते जहाँ में रवि
रुआँसे हुए क्यों बताओ कवि
अँधेरा बसे प्रज्ञ दीप तले
निराला दीपन कूप में पले।।
संजय निराला