गिला क्या करे जग अखाड़ा सही
गिला क्या करे जग अखाड़ा सही
जिन्होंने बनाया उजाड़ा वही
गहे लोभ सब तो हमेशा पिसे
दिखे है नजारा समझ है किसे
रहे ज्ञान आसक्ति कब रे कही
जिन्होंने बनाया उजाड़ा वही
जले दीप हरदम बने जी जगत
पढ़े गीत गीता रहे जो भगत
अवस्था अनाहत विरागी रही
जिन्होंने बनाया उजाड़ा वही
अहिंसा मिटाये गुलामी सभी
यही सब पढ़ाये किताबें अभी
बने हैं विधाता लिखे मिथ बही
जिन्होंने बनाया उजाड़ा वही
बिना चोट किसकी चिकित्सा हुयी
लिए मूढ़ता कब अविद्या गयी
निराला कथन रे अविज्ञा नहीं
जिन्होंने बनाया उजाड़ा वही
संजय निराला