ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम
(शेर)- हाँ, ऐसे ही मेरी इन आँखों में, हमेशा बसी रहो तुम।
मैं लिखता रहूँ नगमें, मोहब्बत बरसाती रहो तुम।।
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नहीं हो कभी, दूर हम तुम।
निभाये सदा, साथ हम तुम।।
यह दुहा करें, रब से हम तुम।
ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम।।—(2)
नहीं हो कभी———————।।
पवित्र- अटूट है, यह प्यार हमारा।
कई जन्मों का है, यह साथ हमारा।।
हाँ, निभाये कसमें सारी हम तुम।
ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम।।—(2)
नहीं हो कभी——————-।।
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(शेर)- हाँ, हमारी मंजिल में कहीं, काँटें भी होंगे।
फिर भी डरकर जुदा, कभी हम नहीं होंगे।।
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चोट तुमको लगेगी, खून मेरा बहेगा।
तेरे जख्म- दर्द, मेरा दिल नहीं सहेगा।।
बांटेंगे दुःख अपने, सारे हम तुम।
ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम।।—(2)
नहीं हो कभी——————-।।
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(शेर)- मेरी यह सारी दौलत- खुशियां, तुझपे कुर्बान है।
क्योंकि तुझमें ही बसती, मेरी खुशी और जान है।।
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एक प्यारा सा घर, हम भी बनायेंगे।
फूल-सितारों से, उसको हम सजायेंगे।।
ख्वाब अपने करेंगे, पूरे हम तुम।
ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम।।—(2)
नहीं हो कभी———————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)