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30 Aug 2025 · 1 min read

हुआ अपावन

मुक्तक
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हुआ अपावन हिम- शिखर, महादेव को कष्ट,
नेता अफसर लोग जब, हुए धर्म से भ्रष्ट।
बादल फटते जा रहे, दरके खूब पहाड़।
तथाकथित निर्माण सब, हुए जा रहे नष्ट।
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पुण्यधरा सहती नहीं, देवों का अपमान।
केवल भौतिक स्वार्थ में, अंधा है इन्सान।
देख लीजिए हर जगह, कैसे किया विकास।
पानी में सब बह रहा, क्यों बनते अनजान।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य, मण्डी, हि.प्र.

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