चाँदनी ,,,,,,,
चाँदनी ,,,,,,,
चमकने लगे हैं
केशों में चाँदी के तार
शायद
उम्र के सफर का है ये
आखिरी पड़ाव
थोड़ा जलता
थोड़ा बुझता
साँसों का अलाव
कह रही है
क्षितिज पर साँझ की लाली
थक गया है शायद
सफर में सफर का माली
पर आज भी
अरमानों की
छोटी सी खिड़की में चमकती
वो आज भी वैसी है
जैसी वो पहले थी
चाहत के पहले पड़ाव पर
पूनम के चाँद की
धवल चाँदनी
सुशील सरना/30-8-25