वाम अंग आओ न !
व्यंग्य
वाम अंग आओ न !
दिल बाएं होता है। थोड़ा सा झुका हुआ। सरेंडर किए हुआ। पत्नी भी बाई तरफ बैठती है। पुरुष हमेशा दाई तरफ होता है। उसका लेफ्ट भी झुका होता है। पत्नी की तरफ। पत्नी को दिल की अफसर है। पति नौकर। दिल की समस्त शक्तियां पत्नी के पास है।
सुना आपने? वाम अंग आ जाओ।
शर्मा जी परेशान थे। दिल में उथल पुथल थी। जो भी सोचते। पत्नी को पता चल जाता। सुनो जी…! यह शब्द ही दिल की धड़कन तेज कर देता है।
शर्मा जी ने पंडित जी से पूछा..स्त्री हमेशा वाम अंग ही क्यों बैठती है?
पंडित जी हैरान। क्या बोलें? जब कुछ उत्तर न हो तो कह देना चाहिए कि शास्त्रों में लिखा है। पंडित जी को जितना पता था, बता दिया। शिव जी की अधिकारी भी शक्ति है।
सवाल लेफ्ट राइट का है और नहीं भी। आप इस गहरी साजिश को समझिए। पति का लेफ्ट यानी दिल कहां है? पोजीशन कहां है? पत्नी की तरफ! और पत्नी का लेफ्ट…? खाली।
दिल पागल है। दिल दीवाना है। दिल अपना है। दिल पराया है। दिल टूटता है। दिल बिखरता है। दिल हंसता है। दिल रोता है। दिल से अपने हैं। दिल से पराए हैं। दिल से दिल है। दिल में बिल है। दिल सुनता है। दिल कहता है। दिल में प्यार है। दिल में व्यापार है। दिल में उमंगे हैं। जीने की तरंगे है। दिल बैठता है। दिल खड़ा होता है। दिल से रिश्ते हैं। दिल में पिसते हैं। दिल मजबूर है। दिल मजदूर है। दिल बसंत है। रंग है। अंत है।
ये सारी उपमाएं बताती हैं, दिल भी आपका नहीं। इन गीतकारों ने क्या क्या गढ़ दिया। एक ने लिखा…दिल अपना और प्रीत पराई। प्रीत को पीर कर लो। समझ जाओगे सारा खेल। हार्ट अटैक का असली कारण यही है। हमारा रिमोट कहीं और है।
राजनीतिक भाषा में कहे तो यह पूर्व नियोजित और गहरा षड्यंत्र है। किसी वक्त विदेशी हाथ बहुत बहुत चलता था। हर चीज में विदेशी हाथ? अब विदेशी हाथ हिलाता रहता है। हम जवाब नहीं देते। क्यों? दिल की मर्जी।
मुट्ठी भर का दिल है। इसमें दुनिया है। दुनिया अपनी नहीं है। वो पत्नी की है। बैठे कोई भी, साइड स्त्री की होती है। फेरों पर दिल का हाल देखा आपने। दूल्हा सारे वचन भरता है। दुल्हन के वचन पंडित जी भर देते है। दुल्हन चूं भी नहीं करती।
अब वाम अंग खतरे में है। वाम कोई भी हो, उसी पर संकट है। वाम में जो पंथ थे, वे समाप्त हो रहे हैं। अपने वाम को संभालिए। दिल वहीं है। दुनिया वहीं है। देश वहीं है। दिल को संभालिए। दिल को थामिए। दिल का इलाज बहुत महंगा है। दिल दीवाना बिन सजनी के माने ना।
सूर्यकांत