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30 Aug 2025 · 1 min read

*साम्ब षट्पदी---*

साम्ब षट्पदी—
30/08/2025

रागदारी।
करते चले हैं,
लेकर ताल सवारी।।
भाव भरे हैं हर काव्य में,
कुछ तो गुप्त है जो बताते नहीं,
उन्हें आभासित है निकट संभाव्य में।।

दरबारी।
न लोटा न थारी।।
फिर क्यों हैं मालामाल।
जो कल तक रहा कंगाल।।
सत्ता सुंदरी का ही ये कमाल है।
चापलूस नहीं उनका वही हाल है।।

फुलवारी।
देखे हैं सजते।
नजर लगती किसी की,
जाता जो तोड़़ते मसलते।
उसे कौन अक्ल देगा कब कहाँ,
जब होगी उसकी इन फूलों से यारी।।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

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