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30 Jul 2025 · 1 min read

समाज सुधार

मैं हुँ एक चिंगारी,
जो लगाएगी आग,
मेरा शीशे की तरह साफ़ है मार्ग।

अपने कलम से लिखूँगा कुछ ऐसा,
न होगा वो पैसे के लिए ,
न होगा वो नफरत जैसा।

मैं पहले अपने अंतरात्मा को करूँगा स्वछ ,
फिर अपनी कलम को चलाऊंगा,
और जागरूकता फैलाऊँगा।

अपने कलम को इस्तेमाल करूँगा ऐसे,
जैसे वो हो तलवार,
उसी तलवार से बुराई पर करूँगा वार ,
और करूँगा समाज सुधार ।

– सतबीर सिंह

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