हिंदी
हिंदी
——
हम हिंदी के उपासक हैं,
हिंदी देवी की मूरत ।
हिंदी भारत की सूरत ।।
हिंदी में संस्कृति की धारा ।
हिंदी मृदुल, जन-जन का नारा ।।
हम हिंदी के उपासक हैं,
इसमें विविध लोकभाषाओं की छवि।
नित सृजन करते लाखों लेखक -कवि।।
हिंदी भारत का जीवन ।
हिंदी भारत का तन-मन ।।
हम हिंदी के उपासक हैं,
हिंदी घर-घर की भाषा ।
हिंदी स्वर्णिम कल की आशा।।
लिखें , पढ़ें और बोलें हिंदी ।
तो हर हाल में समृद्ध हो हिंदी ।।
हम हिंदी के उपासक हैं,
हिंदी साधना, नैतिक दायित्व हमारा ।
हिंदी के प्रति सच्चा हो प्यार हमारा ।।
– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश 283111
9627912535