कुण्डलिया छंद
!! श्रीं !!
🙏
———-
कुण्डलिया
———–
शारद को करके नमन, गुरु को करूं प्रणाम ।
जय राधा प्रिय साँवरे, जय जय सीताराम।।
जय जय सीताराम, बुद्धि बल कौशल पाऊँ।
देना उत्तम भाव, छंद नूतन रच गाऊँ ।।
‘ज्योति’ हृदय में चाह, बनूँ मैं हे हरि नारद ।
करो लेखनी वास, भगवती माता शारद।।
***
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा !
🌷🌷🌷