छत्तीसगढ़ी हास्य कविता
( हास्य व्यंग्य –छत्तीसगढी योग )
शहर म अब कतको झिन रोज बिहनिया कसरत करथे,
तहां ले उमन रंधनी म घुस के पेट ला उत्ता धुर्रा भरथे।
इनला कपाल किरिया-लोम बिलोम घलोक आथे,
जेनला दसे मिनिट करके एमन दुघंटा बर सुत जाथे।
कतको मनखे ला मारनिंग वाक के घलो बड़ शौक हे,
पर पान गुटका तंबाकू इंखर सबले पसंदीदा श्लोक हे।
तेने पाय इंखर पहलवान कस सरीर खराब होवत है,
अउ उंखर वाइफ मन,रामदेव ला पानी पी के कोसत है।
गियानी मन कहे हे,जम्मो मनखे ऐसन करनी से बचय,
मनमोहन सिंग कस सुनय सबके पर कुछु झन करय।
तुलसी कहे हे जेमा मन नइ लगय झन करो वो काम ला,
राबन के देस म भला कोन मनखे पूछत रहिस हे राम ला।
( डॉ संजय दानी )