कल की चाह में, आज परेशान क्यों....?
” एक कल अभी आया नहीं…
एक कल बीत गए…!
मन में कुछ आस लिये, उस कल के लिए…
तुम आज को जीना, क्यों छोड़ दिये…?
बीत गए जो कल, वो अपना अतीत है…
और वर्तमान एक हकीकत है….!
कल की आस लिये हम …
वर्तमान में क्यों हैं, इतना चिंतित…?
संजिदा से इसे व्यतीत कर…
निर्भिक हो, तू कर सफर…!
गुजरे कल की बातों से हम…
आ अब कुछ सीख लें…!
और वर्तमान से प्रेम कर…
इस जीवन की जंग जीत लें…!
कल की उम्मीद के लिए…
आज को सजाना होगा…!
रंग-ढंग इसका, पहचाना होगा…
रूप-रेखा को, अंदाज में अपने, ढालना होगा…!
क्या भविष्य, क्या अतीत…
वर्तमान ही है सच्चा मीत…!
यदि आज हम संभल गए…
इसके लय में लह गए…!
तब समझ लो….
आज की हकीकत में ढल गए…!
अनावश्यक राह नहीं बदलना है…
वर्तमान को ही मीत समझना है
कल की सफर की, तू बातें छोड़…
आज की हर एक पल को, अपने रंग में रंगाना है…! ”
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