हिन्दी भाषा
हिन्दी भाषा
मेरी प्यारी हिन्दी भाषा, भारत की परिभाषा,
सबकी है अभिलाषा, खुलकर बोलिए।
शब्द कोष है विशाल, स्वर व्यंजन की माल,
बनी रहे खुशहाल, भर-भर तोलिए।
सरल-सरस रूप, शब्द शक्ति है अनूप,
समास भरा है सूप, हौले-हौले खोलिए।
अलंकार की झंकार, मुहावरों की बौछार,
भाँति-भाँति का शृंगार, भाव रस घोलिए।।
गैर को भी अपनाती, गले प्रेम से लगाती,
उन्हें अपना बनाती, सबको बताइए।
हिन्दी में हो हर बात, करो जब मुलाकात,
मात चाहे हो या तात, हिन्दी गुण गाइए।
मेरी भाषा मेरी बोली, संधियों की न्यारी टोली,
सजाओ इसी की डोली, काँधे पे बैठाइए।
लिपि देवनागरी है, ज्ञान की ये गागरी है,
घेरवाली घाघरी है, सबको सिखाइए।।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडरीक’
हरिद्वार【उत्तराखंड