चिड़िया कितनी अकेली थी,
चिड़िया कितनी अकेली थी,
पेड़ जब बिल्कुल सूखा था
जब आसमां से गिरी
पहली बारिश की बूंदों ने
प्रकृति को हरा भरा बना दिया
मनुष्य भी अपने आप में बिल्कुल अकेला है,
संघर्ष पथ पर चलते हुए, निरन्तर आगे बढ़ते हुए
अपनी मंज़िल तक पहुंच ही जाता है
©️ डॉ. शशांक शर्मा “रईस”