*आई बारिश तो खिला, मन का सुखद मयूर (कुंडलिया)*
आई बारिश तो खिला, मन का सुखद मयूर (कुंडलिया)
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आई बारिश तो खिला, मन का सुखद मयूर
ऋतुओं की रानी यही, सब मस्ती में चूर
सब मस्ती में चूर, छमाछम बच्चे करते
गलियॉं हैं जलमग्न, पत्तियॉं सिर पर धरते
कहते रवि कविराय, अमीरी देखो छाई
जिसके मन आनंद, तृप्ति उस ही को आई
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451