होश ठिकाने आ जाएंगे
ग़ज़ल
वो समझाने आ जाएंगे
जी को जलाने आ जाएंगे
गर यूँ ही बेहोश रहे तो
होश ठिकाने आ जाएंगे
बात तुम्हारी जब बिगड़ी, वो
बात बनाने आ जाएंगे
दिया जलाने की कह कर वो
आग लगाने आ जाएंगे
नए दोस्त जब-जब आएंगे
दर्द पुराने आ जाएंगे
प्यार पुराना जागेगा तो
नए ज़माने आ जाएंगे
मय को बुरा कहेंगे वाइज़
ज़हर पिलाने आ जाएंगे
-संजय ग्रोवर