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29 Jul 2025 · 1 min read

होश ठिकाने आ जाएंगे

ग़ज़ल

वो समझाने आ जाएंगे
जी को जलाने आ जाएंगे

गर यूँ ही बेहोश रहे तो
होश ठिकाने आ जाएंगे

बात तुम्हारी जब बिगड़ी, वो
बात बनाने आ जाएंगे

दिया जलाने की कह कर वो
आग लगाने आ जाएंगे

नए दोस्त जब-जब आएंगे
दर्द पुराने आ जाएंगे

प्यार पुराना जागेगा तो
नए ज़माने आ जाएंगे

मय को बुरा कहेंगे वाइज़
ज़हर पिलाने आ जाएंगे

-संजय ग्रोवर

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