कभी-कभी
कभी- कभी मेरे दिल में
खयाल आता है
कि बेहतर तो वही
चार दिन की जिन्दगी में
हजारों बरस जियें,
सदियों पे अधिकार नहीं
पर जीना चाहिए जैसा
हम बस वैसा ही जियें ।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
साहित्य वाचस्पति
साहित्य और लेखन के लिए
लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त।