इसीलिए ऐसे नागों को
गीत
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(मुखड़ा)- जिस पर किया भरोसा ज्यादा,उसने धोखा सदा दिया।
इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।(टेक)
(अंतरा१)- जिसको गले लगाया मैंने, जिसको अपना मित्र बनाया।
उसने ही मेरे दुश्मन को, जाकर सारा भेद बताया।
(पूरक)- जिस पर था विश्वास हमारा, उसने विश्वाघात किया।
( टेक)- इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।
(अंतरा २)- जिस पर प्यार लुटाया भर-भर, दुनियाॅं भर से मुख मोडा।
मात-पिता से बैर किया, जिसके पीछे था घर छोड़ा।
(पूरक)- इस बेवफा ने फिर एक दिन, सीना चाकू से गोद दिया।
(टेक)- इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।
(अंतरा 3)- टुकड़ों पर जो पले हमेशा, जब उनकी किस्मत जागी।
कभी काम जो पड़ा हमारा, सबसे पहले रिश्वत माॅंगी।
(पूरक)- कीमत देकर के जमीर की, उनको भी अब तोल लिया।
(टेक)- इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।
(अंतरा४)- देते रहो माल जब तक तुम, वह रिश्तेदार कहाते हैं।
अपना धन यदि राज माॅंग लो, सब रिश्ते मिट जाते हैं।
(पूरक)- ऐसे सब नाते रिश्तो से, नाता हमने तोड़ लिया।
(टेक)- इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।
जिस पर किया भरोसा ज्यादा,उसने धोखा सदा दिया।
इसीलिए ऐसे नागों को, दूध पिलाना छोड़ दिया।।
~राजकुमार पाल (राज) ✍🏻
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)