पथ कैसा भी हो कदम चले निरंतर
पथ कैसा भी हो कदम चले निरंतर
किंचित मन में कोई भय नहीं हो
आत्मबल इतना ठोस हो जिससे
साहस का भी कभी क्षय नहीं हो
पारस नाथ झा
पथ कैसा भी हो कदम चले निरंतर
किंचित मन में कोई भय नहीं हो
आत्मबल इतना ठोस हो जिससे
साहस का भी कभी क्षय नहीं हो
पारस नाथ झा