ये जख्म पुराने हैं जल्दी नहीं भर पाएंगे
ये जख्म पुराने हैं जल्दी नहीं भर पाएंगे
तेरे कूचे पर तो हम भूले से न जाएंगे
इतने खस्ता हालात नहीं हुए हैं अब तक
तुझसे जुदा रह के क्या जी भी नहीं पाएंगे
मानिंद शज़र के फूलों से हैं बदन अपने
मसलोगे हमें तुम खुशबू बन रह जाएंगे
गिरकर संभलना ही है अपने नसीब में तो
ठोकर खाकर हम फिर जल्दी सम्भल जायेंगे
डॉ. राजीव “सागरी”