*साम्ब षट्पदी---*
साम्ब षट्पदी—
28/07/2024
जो सोते हैं।
इस जीवन को,
जीते जी सब खोते हैं।।
बचता केवल पश्चाताप।
वो भी बीत जाते हैं यूँ ही देखते,
कितना किया पुण्य कितना किया पाप।।
तू सो मत।
रह लक्ष्य रत।।
रेखाओं में रंग भर।
अपने हित में अच्छा कर।
समय चूकेगा तो पछतायेगा।
ऐसी अनुकूलता फिर कब पायेगा।।
चल चल।
आयेंगी बाधाएँ।
तेरी भी होगी परीक्षा,
मत सोच अब कहाँ जायें।।
जो भी मिला वह ही रास्ता तेरा है,
भरी नदी सी करता चल कलकल।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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