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28 Jul 2025 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . वक्त

दोहा पंचक. . . . वक्त

हर पर्दे में वक्त के, छिपी हुई है सीख ।
वक्त पड़े तो माँगता, राजा झुककर भीख ।।

बच कर रहना वक्त से, यह शूलों का ताज ।
इसकी तो लाठी सदा, होती बे-आवाज ।।

क्या जाने यह वक्त कब, बदले अपनी चाल ।
तोड़ न पाती जिंदगी, इसका निर्मम जाल ।।

नियत वक्त से पूर्व कब, होता इच्छित काम ।
जीवन की यह फलसफा , इसको करो सलाम ।।

पल भर की देता नहीं, वक्त किसी को भीख ।
अन्तिम क्षण की वक्त में, गुम हो जाती चीख ।।

सुशील सरना / 28-7-25

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