समस्या कैसी भी कठिन हो
समस्या कैसी भी कठिन हो
निदान भी उसका मिलेगा
रात की ही बात है
प्रातः कमल फिर से खिलेगा
परिवर्तन प्रकृति का नियम है
किताबों में अंकित मिलेगा
कल जहां मैदान था
मकान अब तुमको मिलेगा
आज है पतझड़ का मौसम
कल बसंत ऋतु खिलेगा
‘उदास’ मत उदास हो
रास्ता निश्चय मिलेगा
रमेश चंद्र ‘उदास’