गूँज रहा बस जयकारा है
तीजा सोमवार सावन का,शिव भक्ति लीन जग सारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का,गूँज रहा बस जयकारा है।।
शीघ्र सुबह ही स्नान ध्यान कर,शिव जी के मन्दिर जाते हैं।
लोटे में गंगा जल लेकर, श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हैं।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ाकर, कैलाशपति को मनाते हैं।
शिव के सम्मुख हाथ जोड़कर,शिव जी का ध्यान लगाते हैं।
शिव शंकर के मन को भाती,दूध दही जल की धारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का, गूँज रहा बस जयकारा है।।
सजा भव्य है शिव का मंदिर, सुन्दर फूलों मालाओं से।
हो रहा रुद्राभिषेक शिव का,दूध दही जल धाराओं से।
भक्त चढ़ाते भाँग धतूरा, कैलाशपति को मनाने को।
कोई चढ़ाता बेलपत्र फल,निज बिगड़ी सकल बनाने को।
आज शिवालय का अति सुन्दर,लगता रमणीय नजारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का, गूँज रहा बस जयकारा है।।
गाँव शहर हर गली-गली में, धूम मची है शिव शंकर की।
निकल रही है झाँकी मोहक, देवाधिदेव प्रलयंकर की।
भोले शंकर त्रिपुरारी की,गाता महिमा जग सारा है।
दीन-हीन अबला नारी का,शिव ही बस एक सहारा है।
शिव शंकर के जाप मात्र से,जीवन हो जाता न्यारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का, गूँज रहा बस जयकारा है।।
नजर उठाकर शिव को देखो, मनमोहक रूप निराला है।
कानों में वृश्चिक के कुंडल,गल में विषधर मतवाला है।
जटा-जूट बाघम्बरधारी,गल नरमुंडों की माला है।
कर त्रिशूल है प्रलयंकारी,मस्तक चंद्रमा निराला है।
गौर वर्ण नैना कजरारे,शिव मुखमंडल अति प्यारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का, गूँज रहा बस जयकारा है।।
हरी-भरी धरती की शोभा,लगती अत्यंत निराली है।
रिमझिम-रिमझिम पड़तीं बूँदें,कूके कोयल मतवाली है।
शिव के स्वागत में धरती ने,लगता जैसे श्रृंगार किया।
इन्द्रदेव ने भी कृषकों पर, वर्षा करके उपकार किया।
सावन की पावन बेला में, सबने शिव नाम उचारा है।
हर-हर बम-बम महादेव का, गूँज रहा बस जयकारा है।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)