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28 Jul 2025 · 6 min read

साहित्य जगत का एक मसीह महेंद्र अश्क नाम तुम्हारा । लिखे कहे गीत ग़ज़ल नात दोहे आदि सबने तुन्हें पुकारा ।।

साहित्य जगत का एक मसीह महेंद्र अश्क नाम तुम्हारा ।
लिखे कहे गीत ग़ज़ल नात दोहे आदि सबने तुन्हें पुकारा ।।

यूँ तो बिजनौर जिले ने साहित्य क्षेत्र में कई कीर्ति मान स्थापित किए है कई ऐसे प्रसिद्ध कवि, गीतकार,गजलकार फ़िल्म निर्देशक कलमकार जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से विश्व पटल पर अपने गाँव शहर कस्बे से निकलकर देश विदेश में अमिट छाप छोड़ी है ।आज मैं जिनके जीवन की साहित्यिक यात्रा का जिक्र करने जा रहा हूँ । बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी प्रसिद्ध गजलकार जिन्हें हर दिल अजीज कहा जाता था उन्होंने गजलों के साथ साथ गीत ,कविता, भजन ,दोहे नात,मनकबत, नोहा में अपनी विशेष पकड़ रखते हुए विश्व क्षतिज पर अपना परचम लहराया और बिजनौर का ही नही देश का मान बढ़ाया । उनका नाम स्व श्री महेंद्र अश्क जिनका जन्म 24 अप्रैल सन् 1945 को उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर की तहसील धामपुर के ग्राम किबाड़ में एक सम्पन्न त्यागी ब्राह्मण परिवार में हुआ था । आपके पिता स्व.ठाकर सिंह जो कि उर्दू के विशेष ज्ञाता और एक अच्छे शायर हुआ करते थे । आपके एक दादा श्री मोहन सिंह अंग्रेजी हकूमत में दरोगा थे ।सगे दादा हिम्मत सिंह गाँव के जमीदार जोकि गाँव के सरपंच हुआ करते थे । तेरह वर्ष की अल्पायु में पिता जी का देहात हो गया था । माँ ने कठिन परिश्रम करके आपको पढ़ाया था । इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 20 वर्ष की आयु में आपका विवाह वेदकांती के साथ बिलखौड़ा नजीबाबाद के पास जहाँ के प्रसिद्ध ग़ज़लकार गजल हस्ताक्षर दुष्यंत त्यागी का पुश्तैनी गाँव बिलखौड़ा था ।
आपकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही रहकर हुई थी ।
आगे कि शिक्षा मेरठ कालेज से एम० ए ० अंग्रेजी से उत्तीर्ण कर लिया था ।आपकी धर्मपत्नी कम पढ़ी लिखी होने के बाबजूद भी एक कुशल गृहणी थी जिन्होने बच्चों का बहुत अच्छे तरह से लालन पालन के साथ साथ पढ़ाया और उन्हें संस्कारवान बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी क्योंकि आप तो महीने की 30 दिनों में से केवल 20 दिन मुशायरों में ही रहते थे । आपका कहना है कि मुझे अंतरराष्ट्रीय शायर बनाने में मेरी धर्मपत्नी ने अहम भूमिका निभाई । यदि वह घर की जिम्मदरियाँ नहीं सभाल पाती तो मैं यह मुकाम हासिल आसानी से नहीं कर पाता । आपने उनके इस कार्य के लिए कई बार कृतज्ञता व्यक्त की है ।सन् 1968 में आप अपने पैतृक गाँव लौट आए वहाँ आकर जूनियर हाईस्कूल में हैड मास्टर की नौकरी के साथ साथ खेती बाड़ी एक नौकर के हवाले कर दी । आपकी आत्मा तो ग़ज़ल बन गयी थी तो आपने कुछ अरसे बाद ही नौकरी छोड़ दी थी और संपूर्ण जीवन साहित्य के नाम कर दिया था ।आपके चार पुत्र तीन पुत्री है ।
बड़ा पुत्र श्री अमन त्यागी दूसरा बिपिन त्यागी तीसरा नितेश त्यागी और जितेश त्यागी जो तीन पुत्री उनके नाम रजनी त्यागी ,माया त्यागी ओर सीमा त्यागी है ।
बड़े बेटा एक प्रसिद्ध पत्रकार,संपादक अच्छे गजलकार भी है। जो आपके कारवाँ को गति प्रदान कर चल रहे है । छोटा बेटा बिपिन त्यागी प्रसिद्ध प्रोपर्टी डीलर नजीबाबाद में है । गाँव मे आ जाने के बाद आपको एक उस्ताद की कमी खली वह कमी ईश्वर ने जल्द पूरी कर दी उस्ताद शायर साबिर सहसपुरी जी । उनको पाकर आप कुंदन बन गए । सन् 1992 में बच्चों की तालीम के लिए गाँव से नजीबाबाद के आदर्श नगर में आकर बस गए ,ओर वही के हो गए ।
सन् 2024 दिनांक 30 नबम्बर को आपका साकेत वास हो गया । इस खबर से साहित्य जगत में ही नहीं विश्व में दुःख की लहर दौड़ गयी ।

साहित्यिक यात्रा :- आपने 11वर्ष की आयु में ही शायरी कहानी शुरू कर दी थी । आप जब पिता जी के साथ बैठते थे तो पिता जी हुक्का गुड़गुड़ाते और हर कश में एक शायरी सुनाते थे । आपके बड़े भाई बहन जीवित न रहने के कारण आपकी माँ ननिहाल चली गयी । आप अपने नाना नानी के बड़े लाडले थे । आपके मामा धर्मवीर सिंह उस जमाने के प्रसिद्ध शायर हुआ करते थे । आपके पैदा होते ही आपके कानो में गजलों की आवाज पड़ी ।वहीं सप्ताह में एक गोष्ठि हुआ करती थी । जिससे आपके जीवन में गहरा प्रभाव पड़ा । आपकी ननिहाल में बलबंत सिंह ,सतीश चंद्र दर्द, दर्दप्रकाश हुमा, रघुनाथ सिंह आवाद उस जमाने के बहुत अच्छे उर्दू शायर थे ।जिनकी शायरी आप अक्सर सुनते सीखते थे । दसवीं क्लास माछरा (मेरठ) कालिज पहुंचा ।वहाँ ममेरे भाई स्व महावीर सिंह त्यागी डिग्री कालेज में प्रिंसिपल थे । वहाँ उनका साथ ऐसा मिला कि उन्होंने कालेज में एक साप्ताहिक गोष्ठी की व्यवस्था करा दिए । वहाँ से ही आपकी साहित्यक यात्रा को एक नया आयाम ही नहीं मिला आप की साहित्य यात्रा की दशा दिशा दोनों ही बदल गयी । उसके बाद कभी आपने पीछे मुड़कर नहीं देखा आप इतने लोक प्रिय हो चुके थे कि आपको हिन्दू होते हुए भी सिया और सुन्नी दोनों सुनना पसंद करते थे ।
जबकि यह कहा जाता है कि ग़ज़ल लेखन करना कोई आसान काम नहीं है प्रसिद्ध शायर जनाब शीन काफ़ नजमा कहते है ग़ज़ल इशारे का आर्ट है,कोई दो राय नहीं ग़ज़ल की मुश्किल काव्य विद्या है , शिल्प और साधना का संबन्ध योगसाधना की कला से कम नहीं । ये काम आप बा खूबी कर लेते थे ।
आपकी लेखनी को पढ़कर ऐसा लगता ही नही, आज भी आप गजलों में जीवंत है ।
आप से जुड़ी यह रोचक बात यह है कि आपने कभी किसी पुरूष्कार के लिए या किसी सम्मना के लिए नहीं लिखा आपकी आत्मा स्वयं एक चलती फिरती ग़ज़ल बन गयी थी । आप अंतिम पलों तक साहित्यिक कार्यो से जुड़े रहें और साहित्य को पहल देते रहें ।
आपने अपनी लेखनी के बल पर विदेशो में भी डंका बजा रखा था ।
आप अक्सर यही कहा करते थे ।

जिंदगी मैंने जी है इन्हीं गजलों के लिए ।
मेरे बच्चों यही ग़ज़ल है कमाई मेरी ।।

आपकी शायरी में इंसानियत कितनी छलकती थी इसका अंदाज इस शेयर से लगाया जा सकता है ।

फरिश्ते से बहेतर है इंसान बनना ।
मगर इसमें पड़ती है महेनत जियादा ।।

जरा उनकी सोच की परिपक्वता को समझिए
कैसा चरित्र चित्रण उकेरा है । आप सोचने के लिए मजबूर हो जाओगे ओर उन्हें बिना पढ़े नही रह सकते है ।

फ़क़त अपने समझने सोचने का फर्क इतना ।
जो शबनम है वो शोला है जो शोला है वह शबनम है ।।

और सदैव उनके गजलों में सजीव सा चरित्र चित्रण का एक प्रतिबिंब सामने आकर सवाल करने लगता है।

एक कतरा भी मयस्यर न हुआ होंटो को
और आँखों से सुमंदर के सुमंदर गुजरे ।।

आपकी भाषा शैली में कमाल का जादू था आप जब मंच पर आते थे तालियों की आवाज बता देती थी कौन मंच पर पढ़ रहा है आपकी आवाज के दीवाने हिंदू मुस्लिम दोनों ही रहते थे । आपकी पकड़ जितनी हिंदी पर थी उससे कही ज्यादे उर्दू पर थी जबकि आप अंग्रेजी के विद्यार्थी रहे है । आपके बारे में कई प्रसिद्ध साहित्यकारो ने लिखा है । महेंद्र अश्क जी को अभी शेष पढ़ा जाना बाकी है । विश्व प्रसिद्ध होने के बावजूद के द्वारा रचित एक ही पुस्तक प्रकाशित हो पाई थी । उसकी वजह मंचो की व्यस्ता रही ।
आपके द्वारा रचित पुस्तक” धूप उस पार की ” काफी लोकप्रिय एकल गजल सग्रह है । जोकि आपने अपनी मॉ को समर्पित किया । और ग़ज़ल सग्रह के बारे में कहा
मेरा यह गजल सग्रह मेरी माँ के नाम
जिनसे मेरा अस्तित्व जिंदा है ।।

उनका कहा एक शेयर आपके सामने रखता हूँ
मेरे बच्चे सियाने हो गए है
उन्हें कोई हँसता नहीं है ।।

और वे अक्सर दुश्मनी को भूलकार दुश्मन के लिए भी कुछ इस तरह कहा करते थे ।

हम तो खुश्बू है ए दोस्त हम ।
दुश्मन के भी घर जाएंगे ।।

उनके कितने ऊंच कोटि के विचार रहे है । मैं भी उनके निवास स्थान नजीबाबाद पर एक बार मिला हूँ ।
बस उनके साथ बैठ कर एक प्याली चाय पी है ।
मैं बड़ा अभागा हूँ कि ऐसे शख्स के साथ कोई छाया चित्र मेरे पास नहीं है ।
उनके जन्मदिन की घड़ियाँ दिन प्रतिदिन नजदीक आ रही है तो उनकी याद आना स्वाभाविक है ।
उनके जन्मदिन के सुअवसर पर मैं उनके श्रीचरणों में नतमस्तक होते हुए कोटि कोटि नमन वंदन करता हूँ ।आप सभी को उनके जन्मदिन की ढेरों ढेरो शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई देता हूँ ।
और अंत मे अपने शब्दों की आहुति उनके श्री चरणों मे अर्पित करता हूँ ।
तुमको समर्पित शब्द, शब्द की धारा ।
“धूप उस पार की “सग्रह दिया प्यारा ।।
बेजोड़ ग़ज़ल अश्क मन दे झकजोर,
खोले पट मन के करती एक इशारा ।।

राज छुपा हर शब्द में गहरा ।
शब्द बांध लगा दिया पहरा ।।
उत्कृष्ट सृजन के तुम स्वामी,
चमक उठा शब्दों से चेहरा ।।

डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द स्योहारा
जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश
नव साहित्य परिवार भारत
संस्थापक/ संपादक
नव साहित्य ई पत्रिका

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