Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
28 Jul 2025 · 1 min read

ममता छंद विधान सउदाहरण

#विधा:”ममता छंद”मात्रिक।
#विधान:४-७-३-१० मात्रा पर यति, चरणांत लघु लघु(लल)

प्रसंग चयन किया है – विरहिणी नायिका

सोचे , सजनी बैठ, सजन , जी आएँ अब घर |
लेकर , प्रेम अनंग , सहज , सजनी के हों उर ||
खोले , हृदय कपाट , लगे , सब अनुपम सुंदर |
उठती , रहे तरंग , नहीं , पर कोई दे स्वर ||1

काजल , बनकर नीर , सलिल , बहता है दृगतल |
साजन , बैसे दूर , हृदय , में रहते हर पल ||
व्याकुल , सजनी द्वार ,खड़ी , आई है चलकर |
‌करती , आहट खोज , मिलन ,को चाहे पल भर ||2

साजन ,आएँ द्वार , मगन , सजनी का था मन |
बारिस , करके मेघ ,जरा , पुलकित कर दें तन ||
नैनन , में तब नेह , बरस , करता है हलचल |
झूमें , मन की डाल , वहाँ , भींगा है हर पल ||3

उपवन , में क्यों पुष्प , खिले , करने को हलचल |
विरहा , को है शूल , सजन , बिन व्याकुल हरपल ||
वरसें , बाहर मेघ , नयन , भी भींगें आकर |
कह दे , कोई मित्र , सजन , से सब कुछ जाकर ||4

भँवरे , आते द्वार , उड़ें , सब आकर चौखट |
कहते , आकर कर्ण , विरह , से करते खटपट ||
सखियाँ , करतीं ज्ञात , सखी , कितना है वेदन |
साजन , कितनी दूर , करे , जो आकर मेटन ||5

सुभाष सिंघई जतारा टीकमगढ़ म०प्र०

Loading...