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28 Jul 2025 · 1 min read

हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है इसीलिए आनं

हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है इसीलिए आनंद लेने वाले के लिए सरल, विश्लेषण करने वाले के लिए मुश्किल और आलोचना करने वालों के लिए दुष्कर होता है जीवन…🙏🏃🏻‍♂️हमेशा ध्यान रहे।स्वाभिमान सभी का होता है फिर वह हमारे बच्चे हो या माता-पिता हमारे अपने हो या पराये। जितना आत्मसम्मान हमें अपना प्रिय होता है उतना ही सभी के आत्मसम्मान की सोच कर चलें। आपके द्वारा किसी ओर को दिया सही सम्मान निश्चित ही आपको सम्मान का हकदार बनाता है। प्रणाम, नमस्कार, वंदेमातरम् … भारत माता की जय🚭‼️

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