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28 Jul 2025 · 1 min read

जन्म वरण

///जन्म वरण///

जीवन की अरुण प्रतीक्षा लेकर,
बालक जन्म लग्न में आया।
कठिन पीड़ा सह मां ने जन्म दिया,
रूदन देख परिवार हरषाया।।

बड़े अनन्य भाव से जननी ने,
शिशु को सस्नेह निहारा।
दृष्टि अक्षम थे नयना उस क्षण,
परिचर्या से मिला सहारा।।

कितने स्वजन हाथों में ले ले,
शिशु का करते थे बलिहार।
सभी प्रतीक्षारत परिजनों से,
पाया उसने बहुगुणित प्यार।।

कुछ ने नयनों से निरख निहार,
मन भाव सिंधु में बैठाया।
कुछ ने कर गाल स्पर्श करों से,
चुंबन ले मनोभाव सहलाया।।

बड़े लाड़ से बड़े प्यार से,
शिशु पाता मधुता भरा परिवेश।
माता का तो भाव पुष्प था,
खेला करता घर आंगन धूलिवेश।।

स्वरचित मौलिक रचना
रवींद्र सोनवाने ‘रजकण’
बालाघाट (मध्य प्रदेश)

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