*"हरियाली अमावस्या"*
हरियाली की छाया फैली, देती नव जीवन का संदेश,
अमावस की इस रात में, प्रकृति करे विशेष।
वन उपवन हर्षित दिखते, नृत्य करें यह पत्ते,
मेघ मल्हार गगन में छाए, बूँदें मोती है रत्ते।
धरती माँ की गोद सजी है, हरियाली का किया श्रृंगार,
पावस बूँदों की फुहार से, हर्षित है सारा संसार।
बीजों में नव प्राण जगे हैं, खेतों में है उल्लास,
किसान की मुस्कान में बसी, श्रम की देखो मधुर सुवास।
वृक्ष लगाओ, छाया पाओ, यह दिन दे रहा संदेश,
प्रकृति की पूजा करो आज, रखो उसका ख्याल विशेष।
नदियाँ गाएं गीत सुखद, पंछी करें यही पुकार,
संवारे हम यह धरा अपनी, यही ही उसको सच्चा उपकार।
हरियाली अमावस्या आई, लेकर है मंगल भाव,
जीवन में भर दे हरियाली, मिटा दे सबके ताव।
श्रद्धा से यह पर्व मनाओ, प्रकृति से कर प्यार,
संरक्षण इसका ही धर्म हमारा, यही हो हमारा इसको सच्चा उपहार ।