भाव अंतर्मन के बताती है कविता
भाव अंतर्मन के बताती है कविता
भटकता हूं जब राह दिखाती है कविता
अज्ञान तम में भटकता रहा मैं
विषय भोगों में ही अटकता रहा मैं
हृदय का अंधेरा मिटाती है कविता
मेरे शोक संताप का नाश होता
मुझे शान्ति सुख का एहसास होता
हृदय ज्ञान ज्योति जलाती है कविता
मेरा जिस्म ही कैद में अब यहां है
मेरा दिल प्रभु की शरण में वहां है
वही है मेरी मंजिल बताती है कविता
रमेश चंद्र ‘उदास’