यदि कोई प्रेरणा पाकर
यदि कोई प्रेरणा पा करके
परिवर्तन लाते अपने में
वेदनाएं व्यथाएं मिट जायें
जैसे आई हों सपने में
दुःखालय जग है सुख है कहां
आनंद प्रभु नाम के जपने में
ढूंढ़ो तो निश्चय पाओगे
आत्मज्ञान छिपा है अपने में
उमर बीत यूं ही जायेगी
विषय भोगों में फसने में
जीवन का लक्ष्य न खो जाये
परिवर्तन लायें अपने में
रमेश चंद्र ‘उदास’