लेखनी
!! श्रीं !!
लेखनी
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अविरल चलती लेखनी, लिखे नवल अध्याय ।
शक्ति भरी अति कलम में, करती पल में न्याय ।
करती पल में न्याय, यही तकदीर बनाती ।
शब्द अमिट हो जाँय, कलम जिनको लिख जाती ।।
‘ज्योति’ लेखनी थाम, सत्य ही लिखना हर पल ।
करे शारदा कृपा, लेखनी चलती अविरल ।।
०००
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा !
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