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26 Jul 2025 · 1 min read

मुक्तक

लिखते रहते रात दिन, हम साँसों के गीत ।
हर उपमा, उपमान है, छल-छल कागज प्रीत
जग की कहूं विभीषिका, सुनी न मन की बात
जो सहा वो लिखा नहीं, गाते रहे अतीत ।।

सूर्यकांत 🙏

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