माँ
माँ
तेरा आँचल
लगता निर्मल सुंदर
छाया में जिसकी मैं रहती निर्भय
खाऊं पीऊं खेलूँ दिनभर जी भर
सोऊं सुख से सुनकर लोरी प्यारी तेरी
छाँव में तेरी दुख चिंता नहीं कोई मुझको
करूँ सौ सौ बार नमन हर दिन माँ मैं तुझको।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुण्डरीक ‘