अधूरी कविताएं
लिखती हूं कुछ मैं अधूरी कविताएं।
अब हर किस्सा तुम्हें कैसे बताएं।
कभी रह जाए अटके आंख में आंसू
कभी मुस्कराहटों के दीप जगमगाए।
हर कविता में छुपी इक अधूरी हसरत
जिसको पूरा न कर पाये कभी किस्मत।
मेरे अधूरे ख्वाबों सी है मेरी कविताएं
छिपे हैं कुछ लम्हे जो हम जी न पाए
हर कविता को पूरी करने की कोशिश
आप की दुआ से कायम रहे कशिश।
सुरिंदर कौर