ताटंक छ्न्द
ताटंक छ्न्द
अमर रहेगा नाम सदा ही, इस धरती पर वीरों का।
करते देखो सारे वन्दन, अपने नित रणधीरों का।
अर्पित जीवन करके अपना, गर्वान्वित जो होते हैं।
धरती पर यह वीर बांकुरे, यश गाथा को बोते हैं।
इनके बलपर देश हमारा, नींद चैन की सोता है।
बलिदानी सेना पर अपनी, बच्चा-बच्चा रोता है।।
डॉ. सरला सिंह “स्निग्धा”
दिल्ली