यदि उग आते मेरे भी पर
यदि उग आते मेरे भी पर
उड़कर जाते नानी के घर
मामा -मामी, नाना-नानी
रोज सुनाते नई कहानी
नाना जी का हाथ पकड़कर
प्रतिदिन जाते खेत डगर पर
खाते जामुन काले- काले
आम रसीले मधुर निराले
मामा संग जाते बाजार
मोटरगाड़ी पर हो सवार
जमकर खाते खूब मिठाई
खोया रबड़ी दूध मलाई
तरह-तरह के खेल खेलते
नहीं किसी की डाँट झेलते
दिनभर करते हल्ला-गुल्ला
मस्त घूमते खुल्लम-खुल्ला
ऊँची-ऊँची पैंग बढ़ाते
गगन हाथ से हम छू आते
दिनभर करते हम शैतानी
करते बस अपनी मनमानी
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)