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26 Jul 2025 · 1 min read

यदि उग आते मेरे भी पर

यदि उग आते मेरे भी पर
उड़कर जाते नानी के घर

मामा -मामी, नाना-नानी
रोज सुनाते नई कहानी

नाना जी का हाथ पकड़कर
प्रतिदिन जाते खेत डगर पर

खाते जामुन काले- काले
आम रसीले मधुर निराले

मामा संग जाते बाजार
मोटरगाड़ी पर हो सवार

जमकर खाते खूब मिठाई
खोया रबड़ी दूध मलाई

तरह-तरह के खेल खेलते
नहीं किसी की डाँट झेलते

दिनभर करते हल्ला-गुल्ला
मस्त घूमते खुल्लम-खुल्ला

ऊँची-ऊँची पैंग बढ़ाते
गगन हाथ से हम छू आते

दिनभर करते हम शैतानी
करते बस अपनी मनमानी

स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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