मिसालें मित्रता की
मिसालें मित्रता की
सबसे आसान होता है दोस्ती का रिश्ता
सदियों से ही चली आ रही है ये दास्ताँ
साँझा करते गमों के साथ खुशियाँ भी
मुश्किलों में काम आते, वही हैं फ़रिश्ता
कृष्ण-सुदामा की मित्रता बड़ी बेमिसाल
आज भी देते हैं, इस दोस्ती की मिसाल
दोस्त ऐसे हो, गुज़र जाते हैं सालों-साल
नेहरूजी ने बढ़ाया था दोस्ती का हाथ
हिंदी-चीनी,भाई जैसे रहेंगे साथ-साथ
आज तक कर रहें हैं मित्र घात पर घात
लालबहादुर भी कभी गए थे न ताशकंद
आनी थी रिश्तों में और भी मीठी सुगंध
पर आई उनकी मौत से षड्यंत्र की गंध
कहने को पड़ोसी और हम हैं भाई-बंद
समझौतों के साये में खाते कईं सौगंध
दोस्ती की ओढ़नी पे लगाते लाल पैबंद
सरला मेहता