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26 Jul 2025 · 1 min read

#मुट्ठी भर चाहत

#मुट्ठी भर चाहत

मुट्ठी भर चाहत लेकर, ख़ुद को आजमाने निकला हूँ।
चाहत का आवरण ओढ़, आसमान उठाने निकला हूँ।
कदम न डिगने पाएँगे, है विश्वास तपस्या पर अपनी।
इसीलिए एक जुगनू बन, अंधकार मिटाने निकला हूँ।

#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’

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