ग़ज़ल
2122 2122 212
ग़ज़ल
किस अदा से दिल चुराया आपने।
गैर को अपना बनाया आपने।।
सूख कर बे जान था जो हो गया,
बाग खुशियों का सजाया आपने।
चाँद फीका लग रहा था नूर में,
आँख में काजल लगाया आपने।
शबनमी चादर बिछी थी रात की,
शर्म का पर्दा हटाया आपने।
खो चले थे जिंदगी के ख्वाब सब,
राह में दीपक जलाया आपने।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुण्डरीक’