दोहा पंचक. . . . . प्रश्न
दोहा पंचक. . . . . प्रश्न
निश्चित जो संसार में, उस पर कैसा भेद ।
आदि – अन्त के प्रश्न पर, क्यों छलका है स्वेद ।।
उत्तर सारे मौन हैं, प्रश्न सभी वाचाल ।
क्या जाने किस मोड़ पर, जीवन बने सवाल ।।
किसने जानी आज तक, भला काल की चाल ।
हर मानव में करवटें , लेता यही सवाल ।।
प्रश्न अनेकों हैं मगर, मिलते नहीं जवाब ।
कुछ भी तो कहती नहीं, जीवन मौन किताब ।।
इस जीवन को क्या कहें, प्रश्नों का है जाल ।
जिनको उत्तर हम कहें, बनते वही सवाल ।।
सुशील सरना / 25-7-25