ब्रह्म बनाम लोकदेवता: बरहम बाबा।
ब्रह्म बनाम लोकदेवता: बरहम बाबा।
-आचार्य रामानंद मंडल।
ब्रह्म अर्थात् ईश्वर।मिथिला के हर गांव मे बरहम (ब्रह्म) स्थान हय। जे गांव देवता पिपर गाछ तरह माटी के पिंड के रूप मे स्थापित हय। कोनो पूजा पाठ मे ग्राम देवता के रूप मे पूजित होइ हय। अषाढ़ महीना मे विशेष रूप से सामुहिक पूजा कैल जाइ हय।
प्रो मायानंद मिश्र कृत मैथिली साहित्यिक इतिहास के अनुसार पिपर तर ध्यानास्थ बुद्ध के ब्रह्म मानल जाइत रहय।वो बुद्ध कालांतर मे पिंड के रुप ले लेलक आ बरहम बाबा के रूप मे पूजे जाय लागल।बाद मे एकर ब्राह्मणीकरण कैल गेल।
कालांतर मे एकर रूप आउर विकृत भे गेल।इ लोक देवता भे गेल। विभिन्न काल खंड मे विभिन्न लोक नायक सेहो बरहम बाबा बन गेल।इंहा तक कि ब्रह्म सेहो ब्रह्मा आ ब्राह्मण माने जाय लागल।बरहम गीत सेहो ब्राह्मण गीत बन गेल। ब्राह्मण आ गैर ब्राह्मण लोक देवता सेहो बरहम बाबा बन गेलन।
डॉ महेंद्र नारायण राम के कविता बरहम के अनुसार खुटौना के महेश ठाकुर, मैरवा के हरि राम, मझौलिया के भैया राम ,बलहा के रामदुलारी,सुरहाचट्टी के मुरली,सौंधो के हजारी, किलाघाट के पुरूषोत्तम ,लगुराअंव के ईश्वरीदत्त, मनियारी के कुलेश्वर आदि बरहम रुप मे पूजल जाइत हय।
अहम् ब्रह्मास्मि। अर्थात प्रत्येक जीव ब्रह्ममय हय।वोकर विकृत रूप भे गेल।
विचारणीय हय कि आइ तक लोक देवता सलहेस,लोक देवता लोरिक, लोक देवता दुलरा दयाल आ संत कारू खिरहर आदि बरहम बाबा न बन पायल हय। लोक कल्याणकारी काज से लोक देवता पद धारण कैलन परंच आध्यात्मिक ब्रह्म पद से विहिन हतन। लोक देवता आ ब्रह्म के सूक्ष्म अंतर के ऋषि आ ब्रह्मर्षि पद से समझल जा सकैय हय। वर्तमान काल खंड मे कुछ आउर व्यक्तित्व यथा महाकवि विद्यापति आ संत लक्ष्मीनाथ गुसाईं लोक देवता: ब्रह्म अर्थात् ईश्वर बने के दौर मे शामिल हय।
-आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी।