मै आज हक़ीक़त को जानकर ,अपनी झूठी आश पर टिक रहा हूं
मै आज हक़ीक़त को जानकर ,अपनी झूठी आश पर टिक रहा हूं
चापलूसी वफ़ादारी की छोड़कर,अपनी दावेदारी को ठुकरा रहा हूं
जिम्मेदारी मेरी आज ना जाने क्यो हावी हुई कि अक्लबंदी की दीवार को तुड़वा रहा हूं
मै आज हक़ीक़त को जानकर ,अपनी झूठी आश पर टिक रहा हूं
चापलूसी वफ़ादारी की छोड़कर,अपनी दावेदारी को ठुकरा रहा हूं
जिम्मेदारी मेरी आज ना जाने क्यो हावी हुई कि अक्लबंदी की दीवार को तुड़वा रहा हूं