'नर'
हे
नर
मन में
अभिमान
बसे न कभी
रख ध्यान सदा
हो हर जीव सुखी।
हे
नर
देख तू
बनकर
पादप सम
कर उपकार
बने जड़ जंगम।
गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडरीक’
हे
नर
मन में
अभिमान
बसे न कभी
रख ध्यान सदा
हो हर जीव सुखी।
हे
नर
देख तू
बनकर
पादप सम
कर उपकार
बने जड़ जंगम।
गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडरीक’