Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
31 Jul 2025 · 1 min read

बीत रहा है सावन प्रिय

बड़ा ही मनभावन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय,

घटा जब काली काली छाये
मनवा मेरा बहुत अकुलाए
बरस -बरस कर बादल ये
धरती की प्यास बुझाये

कब होगा आवन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय

ठंडी हवा ऐसे लहराये
बदन सिहर सिहर जाए
नाव लहरों से टकराये
मन मेरा ऐसे डगमगाए

मौसम है लुभावन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय

नूर फातिमा खातून” नूरी”
जिला -कुशीनगर

Loading...