बीत रहा है सावन प्रिय
बड़ा ही मनभावन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय,
घटा जब काली काली छाये
मनवा मेरा बहुत अकुलाए
बरस -बरस कर बादल ये
धरती की प्यास बुझाये
कब होगा आवन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय
ठंडी हवा ऐसे लहराये
बदन सिहर सिहर जाए
नाव लहरों से टकराये
मन मेरा ऐसे डगमगाए
मौसम है लुभावन प्रिय
बीत रहा है सावन प्रिय
नूर फातिमा खातून” नूरी”
जिला -कुशीनगर