सवालों का ज़खीरा था
सवालों का ज़खीरा था
मग़र ना था जवाब कोई
कई थे झूठ के दाबेदार
मग़र ना सच का था हितैसी कोई।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
सवालों का ज़खीरा था
मग़र ना था जवाब कोई
कई थे झूठ के दाबेदार
मग़र ना सच का था हितैसी कोई।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”