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25 Jul 2025 · 1 min read

*साम्ब षट्पदी---*

साम्ब षट्पदी—
25/07/2024

(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत

अनगढ़।
मिट्टी कल रहा,
पर आज हूँ सुगढ़।।
सद्गुरु की कृपा अनंत।
जिसने निमित्त बनाया मुझको,
प्रणत भाव है मेरा उनको आद्यंत।।

(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत

अनपढ़।
तू है अनगढ़।।
सीख जा समर्पण।
तब ही होगा ज्ञान वर्षण।।
गुरु सानिध्यता प्राप्त कर बंदे।
तब ही छूट पायेंगे तेरे सब काम गंदे।।

(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत

गड़बड़।
जब हो करती।
तुम पर प्रेम आता,
नेह भावनाओं में भरती।।
स्वीकारती हो अपनी गलतियाँ,
नहीं करती पहले जैसी बड़बड़।।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

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